बुधवार, 16 जुलाई 2014

सेवा भारती दिल्ली प्रान्त का चुनाव

दिनांक : 29 जुलाई, 2014.
दिवस   : रविवार 
सेवा भारती केशव कुञ्ज में प्रवेश करते ही बहुत सुखद अनुभूति होती है | यह हरियाली से भरा हुआ है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का यह मुख्य कार्यालय है यहाँ शुरू में ही एक वातानुकूलित बहुत बड़ा हाल है उसके बाद यहाँ पर निवास के लिए बहुत सारे कमरे हैं यहाँ प्रचारकों के लिए रहने की उचित व्यवस्था है सभी प्रचारक यहाँ आकर ठहरते हैं |

सेवा भारती दिल्ली प्रान्त का चुनाव इसकी मुख्य शाखा केशव कुञ्ज में होना तय हुआ | समय था सुबह 9.30 बजे का ..झंडेवालान मेट्रो स्टेशन पर उतरकर मैंने बैटरी रिक्शा ली और झंडेवालान मंदिर के साथ ही केशवकुंज में प्रवेश किया | मैं जब पहुंची थोड़ी देरी हो चुकी थी बाहर तरीके से चप्पल वगेरह लगा दी गई थी |
अंदर प्रवेश करते ही सबको चन्दन का तिलक किया गया | वातानुकूलित हॉल पूरा खचाखच भरा हुआ था सामने प्रोजेक्टर लगा हुआ था | साइड में सब तरफ कुर्सियां लगी हुई थीं जिन को नीचे बैठने की असुविधा हो रही थी वो सब वहां बैठे थे आधे हाल में सब पुरुष लोग और आधे में सब महिलाएं पंक्तिओं में बैठी हुई थी | सामने मुख्य अतिथि विराजमान थे | जिसमे पूर्व अध्यक्ष तरुण गुप्ता जी ,कार्यक्रम के अध्यक्ष केवल कृष्ण जी ,खंडेलवाल जी उपस्थित थे |इसी हाल के बाएं कोने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक डॉ.केशव बलिराम हेडगेवार की बहुत ही सुंदर प्रतिमा लगी हुई है |






गायत्री मन्त्र के उच्चारण के साथ सभा का आगाज किया गया | उसके बाद प्रेम सागर जी द्वारा मंच संभाला गया और सालाना रिपोर्ट पूरे विस्तृत तरीके से पढ़ी गई | जैसा कि बताया गया सेवा भारती का गठन हर दो वर्ष बाद किया जाता है |



 चुनाव प्रक्रिया शुरू की गई | चुनाव अधिकारी बनाया गया श्री भगवान दास जी को उन्होंने कार्यकर्ताओं को अध्यक्ष के नाम सुझाने की पेशकश की जिसमे तीन कार्यकर्ताओं ने पूर्व अध्यक्ष तरुण गुप्ता जी का नाम रखा और सब ने ॐ की ध्वनि के साथ हाथ उठाकर उसका अनुमोदन किया और निर्विरोध उनको दोबारा दो वर्ष के लिए चुन लिया गया |
पूर्व महामंत्री रामकुमार जी को ही दोबारा महामंत्री चुन लिया गया 
रामकुमार जी ने फिर अपने मंत्रिमंडल को विस्तार देते हुए सबके नाम घोषित किये | सारी प्रक्रिया पूरी होने पर एक संगठन गीत मीना वडेरा जी द्वारा गाया गया | 
उसके बाद बाहर यहाँ भोजन की व्यवस्था की गई थी सबने पंक्ति में लग कर भोजन लेकर उसका आनंद लिया यहाँ पर एक बात जो अखर रही थी वो थी व्यवस्था ,क्योंकि बैठने की कोई व्यवस्था नहीं थी इसलिए सब इधर उधर बैठकर या खड़े होकर पसीने से लथपथ भोजन ग्रहण कर रहे थे क्योंकि गर्मी अपने चरम पर थी |