शनिवार, 30 जनवरी 2016

दीक्षांत समारोह

A grand evening with DCA on 16th Jan.,2016 .. दिल्ली कोलाज ऑफ़ आर्ट के साथ एक भव्य शाम बिताने का स्नेहिल निमंत्रण कुछ दिन पहले मिला । जिस बारे में व्हाट्सऐप से ,फेस बुक से और ख़ास तौर पर कॉल करके भी सूचित किया गया । यह मात्र एक निमंत्रण नहीं था ...
ये नतीजा था ..छात्रों की एक वर्ष की मेहनत का ,
यह ब्यौरा था...DCA के साथ बिताये बहुमूल्य समय का,
एक प्रोत्साहन था... आगे बढ़ने का,
एक जज्बा था...कुछ कर दिखाने का,
यह लम्हा था ... अध्यापकों के गर्व का,
यह सम्मान था.. आये हुए अतिथियों का,
यह समय था... सबसे मिलने का ,यादें समेटने का ,खुशियाँ बटोरने का, खुशियाँ बाँटने का ...
यह रंगीन शाम थी ... दिल्ली कोलाज ऑफ़ आर्ट के दीक्षांत समारोह  की ,जो 16 जनवरी को साईं ऑडिटोरियम में होना तय हुआ था । सबके मिलने का समय रखा गया था दोपहर 1.30 बजे का जबकि सभी प्रबंध करते करते 2.30 बज चुके थे .. सबसे पहले मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वल्लित किया गया और मुख्य अतिथियों को पुष्पकुंज और शाल देकर सम्मानित किया गया ।उसके बाद विधिवत कार्यक्रम शुरू हुए .. बच्चों द्वारा एक परफॉरमेंस और फिर B C Sanyal awards  से awardees को नवाजा गया जिनमें प्रमुख थे ..

अमित कपूर जी
अमित दत्त जी
निलादरी पॉल जी
सुनीत चोपड़ा जी
मोहन सिंह जी
मनोज खुरील जी
नीरज गोस्वामी जी
यह सभी अपने अपने क्षेत्र में महान विभूतियों के नाम हैं जिनको मंच पर बुलाकर Sh. R. S. Verma जी  द्वारा  सम्मानित किया गया ...
इसके बाद छात्र छात्राएं अपनी अपनी परफॉरमेंस देते रहे एवं बीच बीच में पहले वर्ष,द्वितीय वर्ष,तृतीय वर्ष वालों को डिप्लोमा दिया गया और विशेष छात्रों को तृतीय ,द्वितीय और प्रथम अवार्ड से नवाजा गया । उसके बाद गर्मागर्म पकौड़े और चाय का इंतज़ाम था । लगभग 1 घंटे बाद दोबारा से कार्यक्रम शुरू हुआ ...जिसमें बाकी छात्रों को सम्मानित किया गया और कुछ और पर्फोर्मांसस दी गईं ।
दोस्तों ऐसे अवार्ड समारोह तो कई देखे हैं और बहुत सारे अवार्ड्स बाँटे भी हैं लेकिन DCA के दीक्षांत समारोह में आकर जो विशेष सीखने को मिलता है वो है सबको एक बराबर समझना ,जिंदगी की पाठशाला में टिके रहने के लिए जो अनुभवों की जरुरत होती है DCA के ओनर यानि मालिक इसकी स्थापना करने वाले श्री अश्वनी पृथ्वीवासी जी आपको सहज ही बातों बातों में दे जाते हैं यह निश्चित ही उन्होंने अपने गुरु श्री स्नेह भसीन जी एवं माता पिता जी एवं अन्य गुरुजनों से सीखा है .. यहाँ आकर वसुदेव कुटुम्बकम् की परिभाषा भी साबित होती है अश्वनी सर ने अपना सरनेम त्याग कर पृथ्वीवासी साथ लगाया है ...
यहाँ आकर छात्रों को सीखना चाहिए कि आपका गुरु कोई भी हो सकता है चाहे उम्र में वो छोटा हो लेकिन अपने क्षेत्र में वो निश्चय ही आपका गुरु है ... मैंने तो इसी तरह अपने से छोटे दोस्तों से ,बेटे से भी बहुत कुछ सीखा है जो मेरे लिए अतुलनीय है .. आप की आप जानें .. यहाँ आकर आप सीखें नम्रता ,सहजता,मेहनत,  का पाठ . ... कहीं कुछ गलत लिखा गया हो तो कृपया उसे अन्यथा ना लें मुझे सुधार करने के लिए बता दें .. अपनी यादों के पिटारे में अब सब समेटती हूँ फिर कुछ नए अनुभवों के साथ हाजिर होती हूँ ... जल्दी ही ..

चलने की कोशिश तो करो,
हर कदम दिशाएं बहुत है ...
रास्तों में बिखरे काँटों से न डरो ,
तुम्हारे साथ दुआएं बहुत हैं ...
             लेखिका ... सरिता भाटिया   

 आप भी समारोह की कुछ तस्वीरों का आनन्द लीजिये  ...👇👇👇👇