गुरुवार, 2 मई 2013

आखिर कब तक अपनी बेटी को निर्भया और बेटे को सरबजीत बनाना होगा ?

शुभम दोस्तो

  • आज फिर एक लाश के ऊपर नौकरियो की बौशार हुई है  
  • एक बेगुनाह की बेगुनाही साबित करने की कोशिश हुई उसकी मौत के बाद 
  • फिर से अपने पडोसी ने छुरा घोंपा है ,विश्वासघात किया है 
  • आज फिर से सरकारी तंत्र को होश आया है कुछ पल के लिए
   सरकार की नींद खुलती है एक अनहोनी हो जाने के बाद ,23 वर्ष बहुत लम्बा समय होता है इन्साफ पाने के लिए आखिर क्या कसूर था सरबजीत का और उसके परिवार का,आज उसकी मौत पर पूरा देश सकते में है,अभी 16 दिसम्बर को निर्भया के साथ हुई वीभत्स घटना के बाद भी कुछ ऐसा ही आन्दोलन हुआ देश में ,जैसा आज सरबजीत की बहन ने देशवासियो को झिंझोड़ कर याद दिलाया कि हम इस देश के वासी हैं, 2005 से उसने हर आम ख़ास को अपनी गुहार लगाई ,तब किसी को उसका दुःख नजर क्यों नहीं आया | बहुत सारे सवाल छोड़ गया है सरबजीत फिर से हमारे बीच...
  • क्या सरकार इतनी निकम्मी है कि इसको नहीं नजर आया कि सरबजीत का परिवार कैसे गुजर कर रहा होगा 23 वर्ष तक क्यों नहीं उनको तभी नौकरी दी गई ताकि उनके जख्मों पर कुछ मरहम तो लगाया जा सकता ?
  • आखिर इतने साधन मुहैया करवाने के बाद भी जैसा कि सरकार का कहना है क्यों इतनी बेरोजगारी है ? 
  • क्या एक नौकरी पाने के लिए किसी अपने का मरना जरुरी है ?
  • कब तक चलेगी यह वोट की राजनीति ?
  • अभी और कितने बलिदान होंगे इस सरकार को जगाने के लिए ? 
  • हमें एक घर और एक नौकरी पाने के लिए आखिर कब तक अपनी बेटी को निर्भया और बेटे को सरबजीत बनाना होगा  ?
आखिर कब तक यह सब होता रहेगा लोग मरते रहेंगे हर मसले पर सरकार से एक हल पाने के लिए
आओ स्वयं को इसका हिस्सा माने और अपनी पूरी कोशिश लगाएं इस सरकार की निद्रा भंग करने में